इश्क के खेल मेँ सोँचा था हमने भी
चाँद सितारोँ से भरी अपनी हर रात होगी
झरने नदियोँ से समन्दर तक के सफर मेँ (ताउम्र)
आसमां से प्यार भरी बरसात होगी
घनी छाँव होगी तेरी जुल्फोँ की मयस्सर
मेरे आगोश मेँ तेरी भी सुबह शाम होगी
पर
कोई गिला नहीँ तुझसे मुझको
मेरी चाहत को ठुकराने वाली
'रोज गुजरने लगी हो मेरी गली से तुम आजकल
जरूर मुझमेँ कोई तो ऐसी बात होगी ।'
Niks-d
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