Saturday, May 23, 2015

पहली बारिश


तुम्हे याद तो होगी
उन गर्मियों की पहली बारिश
जिसमे हम दोनों अपने - अपने अहं में डूबे थे
तुम्हे बात - बात पर रूठने की
और मुझको तुम्हे मनाने की आदत सी हो गयी थी
बारिश में भीगने को कह रहा था मैं
तुम ‘पहली बारिश है’ कहकर अपने कमरे में चली गयी थी
तुम्हे तो पता है न मेरा बारिश से लगाव ||

कल शाम फिर वैसा ही मौसम था कुछ – कुछ
तुम नही थी न आस - पास
बीती यादो में एक बार फिर डुबकी लगाकर सारी तन्हाई मिटा ली मैंने
वक़्त लगता है...
किसी अकल्पित घटना से बाहर आने में
पर मेरा क्या ?
मेरे पास तो तुम्हारे सिवाय किसी के लिए वक़्त है ही नहीं
नहीं ||


Saturday, May 16, 2015

वो याद है



थी जब तुम साथ तो कोई कमी रहती नही थी 
कठिन कोई डगर मुझको कभी लगती नही थी  
खुशी जिसमे तुम्हे हो उसमे ही मेरी खुशी थी  
वो भी  क्या दिन थे - जब कोई कमी रहती नही थी.. 

नहीं था वादा कोई साथ जीने साथ मरने का  
न कोई कशमकश थी तेरे - मेरे दरमियान  
किया बस एक वादा सालता है अब मुझे 
'मिलना यादों में भी - तो मुस्कुरा के मिलना' 

कि याद आये तो बस तस्वीर तेरी साथ पाना है  
किसी बीते हुए पल में अकेले डूब जाना है  
तेरी यादो के दरिया से गुजर कर पार जाना है  
था वादा मुस्कुराने का - तो मुझको मुस्कुराना है  


      Gul-e-Shazar