Saturday, May 16, 2015

वो याद है



थी जब तुम साथ तो कोई कमी रहती नही थी 
कठिन कोई डगर मुझको कभी लगती नही थी  
खुशी जिसमे तुम्हे हो उसमे ही मेरी खुशी थी  
वो भी  क्या दिन थे - जब कोई कमी रहती नही थी.. 

नहीं था वादा कोई साथ जीने साथ मरने का  
न कोई कशमकश थी तेरे - मेरे दरमियान  
किया बस एक वादा सालता है अब मुझे 
'मिलना यादों में भी - तो मुस्कुरा के मिलना' 

कि याद आये तो बस तस्वीर तेरी साथ पाना है  
किसी बीते हुए पल में अकेले डूब जाना है  
तेरी यादो के दरिया से गुजर कर पार जाना है  
था वादा मुस्कुराने का - तो मुझको मुस्कुराना है  


      Gul-e-Shazar 

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