सूरज की पहली किरण
पानी में खिलता कमल
मद में झूमता भ्रमर
और अधखिला प्रसून
चिड़ियों का संगीत
रजनी का निष्कासन
कहीं दूर मंदिर में
इश्वर का भजन
और मस्जिद में अज़ान
ठण्डी मस्त पुरवाई
कलियों ने ली अंगडाई
बीत गयी निशा
हो गया प्रभात
सिन्दूरी सा हो उठा
पूरब में आकाश
अली ने किया फिर गुंजन
किया पुष्पों से अमृत पान
उठो ! अब आलस छोडो तुम
करो आरम्भ अपना दिन
मेरी कामना है यही
रहो खुश हर पल हर दिन
#नितिन _चौरसिया
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